मुखड़ा सजावे शीशे आगे
मुखड़ा सजावे शीशे आगे
Mukhda sajaave sheeshe aage
KABIR BHAJAN
भजन श्रेणी:KABIR BHAJAN
गायक: BHAKTI SAGAR STUDIO
भाषा: हिंदी
दोहा
मुखड़ा सजावे शीशे आगे (भजन के बोल)
मुखड़ा सजावे शीशे आगे,
मन में झाँक न पावे रे।
दया धरम का दीप बुझा है,
माटी तन इतरावे रे॥
दो दिन का है मेला जग में,
आये और बिछुड़ जाए रे।
मोह माया की गाँठ कस के,
प्राणी खुद को ठग जाए रे॥
मुखड़ा सजावे शीशे आगे,
मन में झाँक न पावे रे।
दया धरम का दीप बुझा है,
माटी तन इतरावे रे॥
सोना चाँदी संग न जाए,
साथ न जाए नाता रे।
एक साँस में छूटे काया,
झूठा जग का पाता रे॥
मुखड़ा सजावे शीशे आगे,
मन में झाँक न पावे रे।
दया धरम का दीप बुझा है,
माटी तन इतरावे रे॥
ऊँचे भवन, भारी साजे,
छाया पल की छाँह रे।
नाम बिना जो जीवन बीते,
वो तो खाली राह रे॥
खाता पीता गर्व करे जो,
कल का उसे न भान रे।
मृत्यु खड़ी सिरहाने बोले,
चल रे प्राणी, जान रे॥
मन का मैल जो आज न धोया,
फिर न धो पाएगा रे।
साँस गिनी है ऊपर वाली,
कब टूट जाए धागा रे॥
सुन ले भाई चेत सको तो,
अभी संभल जा आज रे।
नाम सिमर ले, दया कमा ले,
यही सच्चा साज रे॥
मुखड़ा सजावे शीशे आगे,
मन में झाँक न पावे रे।
दया धरम का दीप बुझा है,
माटी तन इतरावे रे॥
Mukhda sajaave sheeshe aage = KABIR BHAJAN

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