तू शब्दों का दास रे जोगी
तू शब्दों का दास रे जोगी
Pee le pyala ho matwala
KABIR BHAJAN
भजन श्रेणी:KABIR BHAJAN
गायक: BHAKTI SAGAR STUDIO
भाषा: हिंदी
दोहा
मुतू शब्दों का दास रे जोगी
पी ले प्याला हो मतवाला,
प्याला प्रेम हरि रस का
पी ले प्याला हो मतवाला,
प्याला प्रेम हरि रस का
बालपना सब खेल गंवाया,
तरूण नारी बस का
बालपना सब खेल गंवाया,
तरूण नारी बस का
न सत्संग न कथा कीर्तन,
न प्रभु चरण प्रेम बसाया
न सत्संग न कथा कीर्तन,
न प्रभु चरण प्रेम बसाया
पी ले प्याला हो मतवाला,
प्याला प्रेम हरि रस का
पी ले प्याला हो मतवाला,
प्याला प्रेम हरि रस का
न सत्संग न कथा कीर्तन,
न प्रभु चरण न प्रेम रचा
न सत्संग न कथा कीर्तन,
न प्रभु चरणन प्रेम रचा
अबहुं सोच समझ अज्ञानी,
जग में नहीं कोई अपना
अबहुं सोच समझ अज्ञानी,
जग में नहीं कोई अपना
पी ले प्याला हो मतवाला,
प्याला प्रेम हरि रस का
पी ले प्याला हो मतवाला,
प्याला प्रेम हरि रस का
देह मोह में क्यों भरमाया,
गले विच फंद यम का
देह मोह में क्यों भरमाया,
गले विच फंद यम का
चौरासी से उबरा चाहे,
छोड़ कामिनी का चसका
चौरासी से उबरा चाहे,
छोड़ कामिनी का चसका
पी ले प्याला हो मतवाला,
प्याला प्रेम हरि रस का
पी ले प्याला हो मतवाला,
प्याला प्रेम हरि रस का
नाभि कमल विच है कस्तूरी,
मृग फिरे बन का
नाभि कमल विच है कस्तूरी,
मृग फिरे बन का
कहे कबीर सुनो भई साधो,
कबहूं न सतपथ खोजा
कहे कबीर सुनो भई साधो,
कबहूं न सतपथ खोजा
पी ले प्याला हो मतवाला,
प्याला प्रेम हरि रस का
पी ले प्याला हो मतवाला,
प्याला प्रेम हरि रस का
Pee le pyala ho matwala = KABIR BHAJAN

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